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अमिताभ ठाकुर मामले में यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

 Sabahat Vijeta |  2016-12-06 16:02:25.0

AMITABH THAKUR


लखनऊ. आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ 13 जुलाई 2015 को शुरू की गयी विभागीय जांच में उन्हें बिना स्पष्टीकरण का मौका दिए 14 जुलाई को जांच अधिकारी बनाए जाने के आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा रद्द किये जाने के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है.


राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को ख़ारिज करने की मांग की है. साथ ही याचिका के लंबित रहने तक जाँच चलाये जाने की अनुमति भी मांगी है.


अमिताभ ने जाँच अधिकारी की नियुक्ति को विधि विरुद्ध बताते हुए उसे रद्द करने के लिये केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी. जिस पर कैट ने 27 जनवरी 2016 को राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया था. राज्य सरकार ने इस आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में चुनौती दी थी जिस पर जस्टिस सत्येन्द्र सिंह चौहान और जस्टिस विजय लक्ष्मी की बेंच ने 29 सितम्बर के आदेश में राज्य सरकार की याचिका को बलहीन पाते हुए कैट के आदेश को सही बताया था.


हाई कोर्ट ने कहा था कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी अत्यंत संवेदनशील ड्यूटी करते हैं और कई बार उनके निष्पक्ष कार्य के कारण वे सरकार के कोपभाजन होते हैं, अतः उन्हें क़ानून में बचाव के अधिक उपाय दिए गए हैं, जिनका इस मामले में पालन नहीं किया गया. अब सरकार इस फैसले के खिलाफ यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट गयी है कि हाईकोर्ट ने बहुत व्यग्र हो कर अखिल भारतीय सेवा नियमावली की व्याख्या की थी जो सही नहीं है.

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