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यूपी सरकार भी बिहार की तरह शराब पर प्रतिबन्ध लगाए : नीतीश कुमार

 Sabahat Vijeta |  2016-05-15 12:40:02.0

nitishतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. बिहार में पूरी तरह से शराब बंद कराने के बाद पहली बार लखनऊ आये बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की कि बिहार की तरह से वह उत्तर प्रदेश में शराब बंदी की घोषणा करे. उन्होंने कहा कि शराब बंद होने से सरकार का नुकसान नहीं होगा क्योंकि शराब से मिलने वाला 17-18 हज़ार रुपये के टैक्स का नुकसान होगा तो साथ ही शराब पर खर्च होने वाला 60 हज़ार करोड़ रुपये की बचत भी तो होगी. साथ ही शराब की वजह से होने वाली बीमारियाँ कम होंगी और अस्पतालों में होने वाला खर्च भी बचेगा. उन्होंने यूपी सरकार से अनुरोध किया कि बिहार सीमा पर पांच किलोमीटर के क्षेत्र से शराब की दुकानें हटा ली जाएँ ताकि बिहार के लोग यहाँ आकर शराब न पी पायें. नीतीश कुमार आज रवीन्द्रालय में किसान मंच द्वारा आयोजित सम्मलेन को सम्बोधित कर रहे थे.


नीतीश कुमार ने इस बात पर खुशी ज़ाहिर की कि महाराष्ट्र के चन्द्रपुर की महिलाओं की कोशिशों से शराब बंद हो चुकी है. वर्धा में गांधी जी के समय से ही शराब पर पाबंदी है. गुजरात में भी शराब पर प्रतिबन्ध है. इसे पूरे देश में लागू होना चाहिए.


niteesh-2नीतीश कुमार ने कहा कि मेरे मन में लम्बे समय से शराब बंदी को लेकर लम्बे समय से द्वंद्व चल रहा था लेकिन 2015 के चुनाव के दौरान एक जनसभा में एक महिला ने खड़े होकर कहा कि शराब पर प्रतिबन्ध लगा दीजिये. मैंने उसी समय घोषणा की कि इस बार सरकार बनी तो शराब पर प्रतिबन्ध लगा दूंगा. सरकार बन गई तो सोचा कि गाँव में शराब पर प्रतिबन्ध लगाकर रिएक्शन देखा जाये. फिर शहर में इसे लागू करेंगे. गाँव में प्रतिबन्ध लग गया तो महिलाओं ने शहर की दुकानों के बार प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस प्रदर्शन को देखकर यह साफ़ हो गया कि माहौल बन गया है. इस तरह से पहली अप्रैल को गाँव में और 5 अप्रैल से शहरों में शराब पर पूर्ण प्रतिबन्ध लग गया.


उन्होंने कहा कि शराब बंदी के साथ-साथ हमने एक्साइज़ कानून में भी संशोधन किया है. अब बिहार में ज़हरीली शराब बनाने और बेचने वाले के लिए मृत्यु दंड और शराब पीकर उत्पात मचाने वाले के लिए दस साल की सजा का प्राविधान किया गया है. नीतीश कुमार ने बताया कि शराब बंदी अभियान में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका है. उन्होंने एक करोड़ 19 लाख लोगों से शराब न पीने के लिए शपथ पत्र भरवाया है. उन्होंने कहा कि हमने तो महिलाओं को इस बात की भी छूट दे दी है कि अगर कहीं शराब की भट्टी देखें तो उसे तोड़ डालें.


नीतीश कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी यह कहा है कि शराब बेचना और पीना मौलिक अधिकार के क्षेत्र में नहीं आता है. शराब बंदी का कार्यक्रम सामाजिक कार्यक्रम है. यह राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है. उन्होंने कहा कि मोदी जी के गुजरात में शराब नहीं बिकती है तो ज़ाहिर है कि वह खुद भी शराब बंदी के समर्थक हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि सबसे पहले भाजपा शासित राज्यों में शराब पर प्रतिबन्ध लगवाएं.


उन्होंने कहा कि शराब बंद होने से दुर्घटनाओं में कमी आयेगी. घरेलू हिंसा रुकेगी. गंभीर बीमारियों की रोकथाम होगी. अपराध घटेंगे. लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा. इस कीमत पर सरकार टैक्स पर होने वाले नुकसान को तो सह ही सकती है.


इस मौके पर सांसद और जदयू के प्रधान महासचिव के.सी.त्यागी ने कहा कि शराब बंद कराने का बीड़ा महिलाओं ने उठाया था इस वजह से बिहार को इतनी बड़ी कामयाबी मिली. उन्होंने कहा कि देश में चाहे जे.पी. का आन्दोलन रहा हो या वी.पी.सिंह का दोनों में ही युवाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई. शराब बंदी का आन्दोलन भी उसी तर्ज़ का आन्दोलन है. इसमें युवा शामिल हो जाएँ तो देश में शराब बंद होने में समय नहीं लगेगा.


के.सी.त्यागी ने कहा कि यह आन्दोलन किसी सरकार या व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि एक सामाजिक कुरीति के खिलाफ आन्दोलन है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में सभी राजनीतिक दलों को शराब बंदी को अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करना होगा.


महाराष्ट्र के नागपुर से आईं महाराष्ट्र प्रदेश किसान मंच की अध्यक्ष कविता डम्भारे ने कहा कि महाराष्ट्र की महिलाओं ने अपनी मेहनत के बल पर चंद्रपुर में शराब बनना और बिकना पूरी तरह से बंद करवा दिया है. खुद महाराष्ट्र सरकार ने चंद्रपुर को शराब मुक्त घोषित किया है. उन्होंने नितीश कुमार को महाराष्ट्र में आकर शराब बंदी आन्दोलन का नेतृत्व सँभालने की अपील की.


चौथी दुनिया के सम्पादक और पूर्व सांसद संतोष भारती ने महिलाओं को इस बात के लिए बधाई दी कि उन्होंने घर से निकालकर शराब बंदी के लिए आन्दोलन चलाया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने महिलाओं की भावना को समझा और तुरंत और एतिहासिक निर्णय लिया जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं. अपने इस एक क़दम से वह पूरे देश के नेता बन गए.


किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कार्यक्रम का संचालन किया. शेखर दीक्षित ही कार्यक्रम के आयोजक भी थे.








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