Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

मजीठिया की सिफारिशों को लागू कराने के हर संभव उपाय करेगी यूपी सरकार

 Sabahat Vijeta |  2016-05-01 13:06:48.0

press club shahid manzoorतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. मज़दूर दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश क्लब में आयोजित समारोह में सूबे के श्रम मंत्री शाहिद मंज़ूर ने कहा कि पत्रकारों को मंथन करना चाहिए कि किसी भी वेज बोर्ड की सिफारिशें आखिर लागू क्यों नहीं हो पाईं. उन्होंने कहा कि जिस दिन मजदूर एक हो जायेंगे उस दिन किसी भी सरकार की औकात नहीं है कि वह मजदूर की बात मानने से इनकार करे.


श्रम मंत्री ने कहा कि अपनी किस्मत को बदलने के लिए हमें अपनी सोच, अपना नजरिया और अपने आदर्श में बदलाव करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि मीडियाकर्मियों के वेतन को लेकर मजीठिया आयोग ने जो सिफारिशें की हैं उन्हें लागू कराने के लिए हर संभव उपाय करेंगे. उन्होंने कहा कि इसी हफ्ते श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ पत्रकारों की बैठक करायेंगे. ताकि इस मामले का हल हो सके.


hemant ji press clubउत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने इस मौके पर श्रम मंत्री से कहा कि अगर वह मजीठिया आयोग की सिफारिशों को लागू कराने का प्रयास करेंगे तो यह पत्रकारों के के हक में बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि यूपी सरकार को जिलों में चलने वाली सरकारी आवासीय योजनाओं में पत्रकारों का कोटा भी निर्धारित किया जाय.


श्री सिद्दीकी ने कहा कि मान्यता प्राप्त पत्रकारों की तरह सभी श्रमजीवी पत्रकारों को पीजीआई और अन्य सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा मिले. इसके साथ ही पत्रकार बंधू को पुनर्जीवित किया जाय.


उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष व आईएफडब्ल्यूजे (इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट) के उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी ने इस मौके पर कहा कि अखबार में ज़िन्दगी खपाने वाले चन्द्र शेखर त्रिपाठी को तमाम दिक्क़तों की वजह से ट्रेन से कटकर खुद खबर बनना पड़ा. उन्होंने कहा कि मशीनीकरण होने के बाद अखबारों में काम करने वालों की छंटनी हो गई.


hemant- press club-2उन्होंने कहा कि नवभारत टाइम्स बंद होने के इतने बरस बाद उसे फिर से शुरू किया गया तो पुराने साथियों को नज़रंदाज़ किया गया. हेमंत तिवारी ने कहा कि मजीठिया आयोग की सिफारिशों को अखबार मालिकों ने नहीं माना, सुप्रीम कोर्ट में यह मामला गया तो सलमान खुर्शीद और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वकीलों ने पत्रकारों के अधिकारों के खिलाफ बहस की. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं आईएफडब्ल्यूजे के सेक्रेटरी जनरल परमानंद पांडेय ने अपनी कोशिशों से मजीठिया आयोग की सिफारिशों को इस अंजाम तक पहुंचाया.


लखनऊ श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष सिद्धार्थ कलहंस ने कहा कि मजीठिया की सिफारिशों पर उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक स्टेट्स रिपोर्ट भी जारी नहीं की है. उन्होंने कहा कि आईएफडब्लूजे के उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुख्य सचिव आलोक रंजन को हकीकत बताई तब सरकार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top