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निजी घरानों से बिजली खरीद के करारों की हो पुनर्समीक्षा

 Avinash |  2017-03-28 11:10:48.0

निजी घरानों से बिजली खरीद के करारों की हो पुनर्समीक्षा

तहलका न्यूज़ डेस्क
लखनऊ. केन्द्रीय विद्युत् मन्त्री पीयूष गोयल और यूपी के ऊर्जा मन्त्री श्रीकान्त शर्मा के मध्य कल दिल्ली में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुधारने हेतु लिए गए निर्णयों का स्वागत करते हुए बिजली इन्जीनियरों ने कहा है कि अगले दो साल में सबको 24 घण्टे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में सर्वोच्च प्राथमिकता पर बिजली चोरी को सख्ती से रोकना होगा होगा | उत्तर प्रदेश के बिजली इन्जीनियर इस मुहिम में पूरी तरह सहयोग करेंगे | बिजली अभियंताओं का कहना है कि बिजली चोरी को सरकारी खजाने से नगदी चोरी के समतुल्य माना जाये और कठोर कदम उठाये जाएँ |
विद्युत् आपूर्ति के मामले में वीआईपी जिलों की परम्परा समाप्त कर सभी 75 जिलों को एक समान मानने के ऊर्जा मन्त्री श्रीकांत शर्मा के बयान का स्वागत करते हुए अभियंताओं ने कहा कि सबसे कम लाईन हानियों के क्रम में श्रेणी बनाकर 24 घंटे बिजली देने का रोस्टर तय किया जाये अर्थात जिन जिलों में 15 प्रतिशत या कम हानियाँ हों वहां 24 घंटे बिजली देने की प्राथमिकता हो , इससे भी बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा |

यह प्रयोग महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों में सफल रहा है | आल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, उप्रराविप अभियन्ता संघ के अध्यक्ष जीके मिश्र, महासचिव राजीव सिंह और वरिष्ठ उपाध्यक्ष राम प्रकाश ने आज यहाँ कहा कि अधिकांशतया बिजली चोरी राजनीतिज्ञों के संरक्षण में होती रही है | उन्होंने उदाहरण दे कर बताया कि वित्तीय वर्ष 2015 - 2016 के पावर कारपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार उप्र में कुल हानियाँ 25.33 % हैं जबकि इटावा और कन्नौज में लाइन हानियाँ लगभग 70% या अधिक हैं, मैनपुरी, आजमगढ़ आदि कुछ अन्य जगहों पर हानियाँ 50% से अधिक हैं | उन्होंने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि प्रान्तों में प्रबंधन ने अभियंताओं को विश्वास में लेकर कार्य योजना बनाई और इन प्रान्तों में लाइन हानियाँ 15% से कम हो गयी हैं| उप्र में भी सार्थक कार्य योजना और दृढ राजनीतिक इच्छा शक्ति से यह लक्ष्य प्राप्त करना कोई मुश्किल कार्य नही है |

मुख्य मन्त्री योगी आदित्य नाथ और ऊर्जा मन्त्री श्रीकांत शर्मा के योग्य नेतृत्व में विद्युत् अभियंता इस हेतु संकल्प बद्ध हैं | 25 साल से अधिक पुराने बिजली घरों को बन्द कर उनके स्थान पर 660 मेगावाट की सुपर क्रिटिकल इकाइयाँ लगाने के निर्णय की सराहना करते हुए अभियन्ता पदाधिकारियों ने कहा कि निजी घरानों पर अति निर्भरता की ऊर्जा नीति में बदलाव कर अधिक से अधिक नए उत्पादन प्लान्ट सरकारी क्षेत्र में लगाए जाने चाहिए जिससे आम लोगों को सस्ती बिजली मिल सके क्योंकि निजी क्षेत्र मुनाफे के लिए काम कर रहे हैं जबकि सरकारी क्षेत्र के बिजली घर बिना लाभ लिए लगत पर बिजली दे रहे हैं |

वर्ष 2015-2016 में पावर कारपोरेशन ने विद्युत् उत्पादन निगम से रु 3.80 प्रति यूनिट, जल विद्युत् निगम से 67 पैसे प्रति यूनिट, एनटीपीसी से रु 3.09 प्रति यूनिट पर बिजली खरीदी जबकि निजी घरानों से रु 4.14 प्रति यूनिट पर सबसे महंगी बिजली खरीदी गयी | उन्होंने मांग की कि निजी घरानों से बिजली खरीद के करारों की पुनर्समीक्षा की जाए और बाजार में सस्ती बिजली उपलब्ध होने पर सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों को बन्द करने के बजाये निजी घरानों से बिजली लेना बन्द किया जाए और आवश्यकतानुसार निजी घरानों के बिजली क्रय करार रद्द किये जाएँ | बिजली अभियंताओं ने यह भी कहा कि सरकारी क्षेत्र के 25 साल से अधिक पुराने आनपारा बी बिजली घर से रु 2.1 प्रति यूनिट, आनपारा ए से रु 2.88 प्रति यूनिट, ओबरा बी से रु 2.63 प्रति यूनिट और ओबरा ए से रु 2.76 प्रति यूनिट की दर पर बहुत सस्ती बिजली मिल रही है अतः इन बिजली घरों को बन्द करना उपयुक्त नहीं होगा |
उन्होंने कहा कि 60 हज़ार करोड़ रु से अधिक के घाटे और कर्ज में डूबी विद्युत् वितरण कम्पनियों को इससे उबारना बड़ी चुनौती है जिसके लिए बिजली हानियाँ 15 % से नीचे लाना और बिजली कि लागत कम करना मुख्य ध्येय होना चाहिए | अभी बिजली को उपभोक्ता के घर पहुंचाने में लगभग रु 6 प्रति यूनिट लागत आ रही है जबकि औसत टैरिफ लगभग रु 4.45 प्रति यूनिट है | इस गैप को कम किये बिना वितरण कम्पनियों को घाटे से नहीं उबारा जा सकता है | उन्होंने बताया कि उप्र के विद्युत् अभियंता विस्तृत ब्लू प्रिन्ट तैयार कर रहे हैं जिसे अगले सप्ताह ऊर्जा मन्त्री श्रीकांत शर्मा को दिया जाएगा |

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Avinash ( 3157 )

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