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डीएम बने रहें या बन जाएँ, इसलिए ट्रेनिंग को "ना"

 Utkarsh Sinha |  2017-04-06 13:36:14.0

डीएम बने रहें या बन जाएँ, इसलिए ट्रेनिंग को ना

तहलका न्यूज ब्यूरो

लखनऊ. यूपी के आईएएस अधिकारी बहुत होशियार हैं, चाहे सीधी भर्ती से आये हों या फिर प्रादेशिक सिविल सेवा से प्रोन्नत. सूबे में निजाम बदलने के बाद इन अफसरों में डीएम के पद पर बने रहने या बनने का मोह बढ़ गया है. ताजा उदाहरण है सेवा के दौरान मध्यावाधि प्रशिक्षण का कार्यक्रम. आईएएस अधिकारियों के लिए लाल बहादुर शास्त्री अकादमी मसूरी में होने वाला विशेष प्रशिक्षण आवश्यक माना जाता है लेकिन तृतीय चरण के इस कार्यक्रम के लिए नामित कुल 47 में सिर्फ 13 अफसरों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई. 2003 से 2009 बैच के ये अफसर जिलों में कलेक्टर पद पर तैनाती के पात्र हैं. और यह उस वक्त हो रहा है जब लम्बे अरसे बाद उत्तर प्रदेश में आईएएस संवर्ग का कोटा अपने पूर्ण स्तर पर है. आम तौर पर उत्तर प्रदेश में कोटे के विपरीत आईएएस अफसरों की कमी रहती रही है और इस वजह से प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले समय सीमा पर उपस्थिति नहीं हो पाती थी.

मतलब साफ़ है कि आईएएस संवर्ग के वे 34 अधिकारी जिन्होंने इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के आवेदन में दिलचस्पी नहीं दिखाई या विलंबित हुए, उनकी निगाह या तो जिलाधिकारी पद पर बने रहने पर है या फिर बनने की प्रत्याशा है. उल्लेखनीय है कि इन अफसरों में जिन 13 लोगों ने प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण कराया है उनमें, राजशेखर, कौशल राज शर्मा, जुहेर बिन सगीर, सुहास एल वाई और पवन कुमार फिलहाल जिलाधिकारी के पद पर तैनात हैं. पीसीएस से प्रोन्नत सिर्फ 3 अफसर ही इसमें शामिल हो रहे हैं.
दरअसल जिस वक्त सूबे की नयी सरकार अपने प्रशासनिक अमले को चुस्त दुस्रुत करने के लिए काबिल अफसरों की तैनाती की कवायद में जुटी है उस वक्त यूपी के 13 आईएएस अफसर 25 दिन की मिड सर्विस ट्रेनिंग फेज 3 के लिए मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री एकेडमी में अपनी आमद दर्ज कराएंगे. भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने यूपी कैडर के 2003 से 2009 बैच के 47 आईएएस अफसरों को इस ट्रेनिंग में शामिल होने का पत्र भेजा था जिसके लिए उन्हें आनलाईन रजिस्ट्रेशन कराना था मगर यूपी के 13 अफसरों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया. यह प्रशिक्षण 10 अप्रैल से शुरू हो कर 5 मई तक चलेगा. प्रशिक्षण के लिए जा रहे अफसरों में, सत्येन्द्र कुमार सिंह, राजशेखर, दिग्विजय सिंह, कौशल राज शर्मा, प्रांजल यादव, जुहेर बिन सगीर, नवीन कुमार जीएस, बी मुत्थुस्वामी, सुहास एल वाई, आदर्श सिंह, सरोज कुमार, पवन कुमार और बालकृष्ण त्रिपाठी शामिल है. उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश के जिन आईएएस अधिकारियों को इस प्रशिक्षण के लिए नामित किया गया है उनमें 2003 बैच के भगेलू राम शास्त्री और सत्येन्द्र कुमार सिंह, 2004 बैच के बीरेंद्र कुमार सिंह, रोशन जैकब और राजशेखर 2005 बैच के शमीम अहमद खान, नरेन्द्र शंकर पाण्डेय, दिग्विजय सिंह, अजय शंकर पाण्डेय, जीतेन्द्र बहादुर सिंह, योगेश्वर राम मिश्रा और दिनेश कुमार सिंह, 2006 बैच के योगेश कुमार शुक्ला, जुहेर बिन सगीर, कौशल राज शर्मा, प्रांजल यादव और हृषिकेश भाष्कर यशोद, 2007 बैच के नवीन कुमार जी एस, प्रभु नारायण सिंह, सुहास एल वाई, अभय तथा आदर्श सिंह, 2008 बैच के के विजेंद्र पांडियन, कुमार रविकांत सिंह, पवन कुमार, अमृत त्रिपाठी, राजेश कुमार, बी चन्द्रकला, अनिल धींगरा और बालकृष्ण त्रिपाठी, सरोज कुमार, किंजल सिंह, 2009 बैच के सूर्यपाल गंगवार, शुभ्रा सक्सेना, अदिति सिंह, विजय किरण आनंद, भानचन्द्र गोस्वामी, अनुज कुमार झा, माला श्रीवास्तव, नितिन बंसल, रुपेश कुमार,मासूम अली सर्वर, विवेक, भूपेंद्र चौधरी, प्रकाश बिंदु, एस राजालिंगम और वैभव श्रीवास्तव शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि 2009 बैच के अधिकाँश अधिकारी सीधी भर्ती के आईएएस हैं और इनमें से कई विभिन्न जिलों में डीएम के पद पर तैनात हैं. इन अफसरों में से किसी एक ने भी प्रशिक्षण के लिए नामांकन के बावजूद आवेदन नहीं किया है. योगी सरकार के बनने के करीब 18 दिन बाद अभी सरकार ने नौकरशाही में कोई फेरबदल नहीं किया है. उम्मीद की जा रही है कि विभागीय प्रस्तुतियां देखने के बाद योगी सरकार नौकरशाही में बदलाव करेगी. ऐसे में उसे नए जिलाधिकारी नियुक्त करने में अफसरों की कोई कमी नहीं होगी.


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