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भारतीय संस्कृति में 64 कलायें, हर कला का अपना महत्व

 shabahat |  2017-03-27 16:22:27.0

भारतीय संस्कृति में 64 कलायें, हर कला का अपना महत्व

राज्यपाल ने तीन दिवसीय शास्त्रीय नृत्य उत्सव का उद्घाटन किया
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज संत गाडगे प्रेक्षागृह में संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार एवं संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय शास्त्रीय नृत्य उत्सव 'नृत्य प्रणति' का उद्घाटन किया. इस अवसर पर संगीत नाटक अकादमी की सदस्य सुश्री कमलिनी, संस्कृति विभाग की संयुक्त निदेशक श्रीमती आराधना गोयल, प्रख्यात रंगकर्मी अतुल तिवारी सहित बड़ी संख्या में शास्त्रीय नृत्य के प्रेमीजन उपस्थित थे.

राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि भारतीय नव वर्ष की पूर्व संध्या पर नृत्य उत्सव आयोजित किया जा रहा है. नवसंवत्सर को गुड़ी पाडवा, उगादि, चेटीचंद आदि पर्व के नाम से भी मनाया जाता है. उन्होंने अपनी शुभकामना देते हुये कहा कि नव वर्ष सबके लिये मंगलमय हो. राज्यपाल ने इस अवसर पर समस्त कलाकारों को 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस मनाये जाने की बधाई दी.

श्री नाईक ने कहा कि भारतीय कला की विशेषता है कि यह सबको आकृष्ट करती है. नृत्य संगीत की अपनी कोई भाषा नहीं होती है. भारत में कला की संस्कृति बहुत पुरानी है. कला सीमाओं से परे है, उसे किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता. भारतीय संस्कृति में 64 कलायें हैं और हर कला का अपना महत्व है. उन्होंने कहा कि कला की विविधता मनुष्य को मंत्रमुग्ध करती है तथा उससे आनन्द और समाधान प्राप्त होता है.

कार्यक्रम में राज्यपाल ने चेन्नई से पधारी सुश्री पारवती रवि घण्टशाला का भरतनाट्यम तथा नासिक की सुविख्यात कलाकार सुश्री रेखा नादगौड़ा की कथक प्रस्तुति को भी देखा.

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shabahat ( 2177 )

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