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भाषा एक दूसरे को जोड़ने का साधन हैं : राज्यपाल

 shabahat |  2017-03-28 16:04:43.0

भाषा एक दूसरे को जोड़ने का साधन हैं : राज्यपाल

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज लखनऊ विश्वविद्यालय के फारसी विभाग एवं बेदिल इंटरनेशनल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन किया. इस अवसर पर कुलपति प्रो. एस.पी. सिंह, फारसी विभाग के प्रमुख आरिफ अय्यूबी, डॉ. अम्मार रिज़वी तथा देश-विदेश से आये अन्य विद्वतजन मौजूद थे.

राज्यपाल ने कहा कि संगोष्ठी में विचारों के मंथन से जो निष्कर्ष निकलेगा निश्चित रूप से उपयोगी होगा. यदि इस सम्बन्ध में केन्द्र या राज्य सरकार से कोई सहयोग अपेक्षित होगा तो वह निश्चित रूप से सेतु की भूमिका निभायेंगे. फारसी, अरबी, उर्दू, हिन्दी जैसी भाषायें आपस में बहनें हैं. शायद इनका डीएनए एक ही है, इसलिये दक्षिण एशिया को जोड़ने का काम ये भाषायें करती हैं. भाषा एक दूसरे को जोड़ने का साधन हैं. सभी भाषाओं को उचित सम्मान और विकास का अवसर मिलना चाहिये. फारसी भाषा आज भी प्रासंगिक है. अदालतों में अभी भी फारसी शब्दों का उपयोग होता है. फारसी भाषा के कारण ही ऐतिहासिक इमारतों में फारसी शैली देखने को मिलती है. फारसी में रोजगार की नयी संभावनायें तलाशनी होंगी. उन्होंने कहा कि अनुवादक के रूप में भी फारसी की उपयोगिता है.

श्री नाईक ने रामपुर रज़ा लाईब्रेरी की बात करते हुये कहा कि रामपुर रज़ा लाईब्रेरी केवल उत्तर प्रदेश या देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपने बेजोड़ संग्रह के लिये जानी जाती है. लाईब्रेरी में लगभग 17,000 अरबी, फारसी, संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, तुर्की और पश्तो जुबान की हस्तलिखित पाण्डुलिपियाँ हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामिनाई को मिर्जा गालिब का दीवान और फारसी में रामायण रामपुर रज़ा लाईब्रेरी से लेकर भेंट किया था. उन्होंने कहा कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी को और समृद्ध करने के लिये यदि संगोष्ठी के माध्यम से कोई सुझाव आयेगा तो वे लाइब्रेरी के अध्यक्ष के नाते निश्चित रूप से उस पर विचार करेंगे.

कार्यक्रम में अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे. राज्यपाल ने अपनी पुस्तक चरैवेति! चरैवेति!! की उर्दू प्रतियाँ भी बाहर से आये मेहमानों को भेंट कीं.

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