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दक्षिण एशियाई देशों के विकासात्मक अनुभव एक दूसरे के लिये प्रासंगिक हैं : राज्यपाल

 shabahat |  2017-03-03 16:52:56.0

दक्षिण एशियाई देशों के विकासात्मक अनुभव एक दूसरे के लिये प्रासंगिक हैं : राज्यपाल


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में एथनोग्राफिक एण्ड फोक कल्चर सोसाइटी तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं एंथ्रोपोलाजी विभाग द्वारा आयोजित 'दक्षिण एशिया में राजनीति, समाज तथा संस्कृति' विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया. संगोष्ठी में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी सिंह, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रो. आनन्द कुमार, एथनोग्राफिक एण्ड फोक कल्चर सोसाइटी के अध्यक्ष जी. पटनायक, यूनिवर्सिटी आफ पर्थ, आस्ट्रेलिया के प्रो. फ्रांसिस लोबो सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र-छात्रायें उपस्थित थे.

राज्यपाल ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि भारत 1947 में आजाद हुआ और हमारे देश का जनतंत्र सफलतापूर्वक चल रहा है. इतना सफल जनतंत्र अन्य देशों में नहीं है. भारत को विकासशील देश कहा जाता है इसलिये राजनीति, समाज और संस्कृति अपने आप में महत्वपूर्ण घटक हैं. दक्षिण एशियाई देश विचार की दृष्टि से अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन उनमें सांस्कृतिक और सामाजिक परम्पराओं में समानता है. इन देशों की सभ्यता और सामाजिक व्यवस्था का एक-दूसरे पर प्रभाव पड़ा है. दक्षिण एशियाई देश शिक्षा, स्वास्थ्य, आतंकवाद और बेराजेगारी जैसी चुनौतियों पर संयुक्त रूप से विचार करें. उन्होंने कहा कि देशों की परिस्थितियाँ भिन्न हो सकती हैं पर आपसी सहयोग से हम प्रगति कर सकते हैं.

श्री नाईक ने कहा कि भारत वसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास करता है. उन्होंने संस्कृत के श्लोक को उद्धृत करते हुये कहा कि तेरा और मेरा विचार छोटी सोच वाले लोग करते हैं जबकि उदार चरित्र वाले लोग पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं. विश्व की पुरातन संस्कृति में भारत का यही संदेश है जो संसद के मुख्य द्वार पर लिखा है. बौद्धिक एवं सांस्कृति आदान-प्रदान का हमें लाभ उठाना चाहिये. दक्षिण एशियाई देशों के बीच में विकासात्मक साझेदारी के लिये राजनैतिक समझ होना महत्वपूर्ण है. राजनैतिक संवाद के जरिये इसकी पूर्ति की जा सकती है. सामाजिक आर्थिक विकास को उच्च स्तर पर पहुँचाने हेतु यह आवश्यक है कि हम अपने मूल्यों, विश्वासों तथा सहयोग द्वारा राजनीति से जुडे़ रहें. उन्होंने कहा कि हमारे विकासात्मक अनुभव एक दूसरे के लिये प्रासंगिक हैं.

एथनोग्राफिक एण्ड फोक कल्चर सोसाइटी के अध्यक्ष जी. पटनायक ने स्वागत उद्बोधन देते हुये कहा कि एशियाई देश अपनी भौगोलिक, सांस्कृतिक तथा राजनैतिक विशिष्टता के लिय जाने जाते हैं. संगोष्ठी में कुलपति प्रो. एस.पी. सिंह, प्रो. आनन्द कुमार, प्रो. फ्रांसिस लोबो सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे.

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