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तीन दिवसीय संस्कृति उत्सव में दिखेगी कई राज्यों की लोक संस्कृति

 shabahat |  2017-03-14 13:15:21.0

तीन दिवसीय संस्कृति उत्सव में दिखेगी कई राज्यों की लोक संस्कृति


तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. उत्तर प्रदेश का संस्कृति विभाग 17 से 19 मार्च तक संस्कृति उत्सव का आयोजन करेगा. गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी परिसर में होने वाले इस संस्कृति उत्सव में अवध के पारंपरिक लोक नृत्य और लोक गायन के साथ-साथ असम, उत्तराखंड और हरियाणा की संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी. प्रदेश के संस्कृति सचिव डॉ. हरिओम ने संस्कृति उत्सव के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस मौके पर अवधी व्यंजनों के साथ-साथ बुंदेलखंड और रूहेलखंड के व्यंजनों का जायका भी मिलेगा.

डॉ. हरिओम ने बताया कि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी परिसर में होने वाले इस तीन दिवसीय संस्कृति उत्सव में पहले दिन संत गाडगे सभागार में राष्ट्रीय कथक संस्थान लखनऊ घराने के कथक से कार्यक्रम की शुरुआत करेगा. पहले दिन के ख़ास आकर्षण में असम की उत्पल ज्योति बोरा द्वारा प्रस्तुत असम का लोकनृत्य बिहू, दुर्ग के सुखदेव बंजारे द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ का लोक नृत्य पंथी, हरियाणा के भारत भूषण द्वारा प्रस्तुत हरयाणवी लोक नृत्य घूमर, धमाल एवं जंगम, सागर के प्रहलाद कुर्मी द्वारा प्रस्तुत मध्य प्रदेश का लोक नृत्य राई, रूबीना अख्तर द्वारा प्रस्तुत कश्मीर का लोक नृत्य रूफ, वाराणसी की सुचरिता गुप्ता द्वारा प्रस्तुत चैती एवं ठुमरी और दिल्ली के बिलाल चिश्ती और साथियों का सूफी गायन शामिल रहेगा.

उन्होंने बताया कि पहले दिन लखनऊ के राजेश पाल का जादू, फैजाबाद के मुकेश कुमार का फरुवाही लोक नृत्य, अमेठी के अशोक त्रिपाठी का नटवरी लोकनृत्य, अम्बेडकरनगर के छविलाल पाल का अहिरवा लोकनृत्य, रायबरेली के रामरथ पाण्डेय का आल्हा लोक गायन और लखनऊ की मालविका का लोकगायन भी ख़ास आकर्षण के रूप में रहेगा.

संस्कृति उत्सव के दूसरे दिन स्थानीय कलाकारों के अलावा हरियाणा, कश्मीर, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे. तीसरे और अंतिम दिन उत्तराखंड, कश्मीर, असम और छत्तीसगढ़ के कलाकार अपने-अपने राज्य की संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे. इस मौके पर संस्कृति उत्सव में अवध के अलावा पूर्वांचल, बुंदेलखंड और रूहेलखंड के मशहूर खानों का जायका भी मिलेगा.

डॉ. हरिओम ने बताया कि उत्सव में बुंदेलखंड की थाली, ब्रज का श्रीकृष्ण भोग, उरई का रसगुल्ला, वाराणसी का नाश्ता, गोरखपुर का बाटी चोखा, आजमगढ़ का हांडी मटन, अवध का सनातकदा का अड्डा, लखनऊ के चौक की चाट, पान की गिलौरी और पान का चिल्ला व्यंजन उत्सव में ख़ास आकर्षण रहेगा.

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