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उत्तराखंड में धारा-144 लागू, जानिए मायावती किसे देंगी समर्थन

 Tahlka News |  2016-05-10 03:55:45.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
नई दिल्ली:
 उत्तराखंड में पिछले पौने दो महीने से चली आ रही राजनीतिक उठापटक और कानूनी दांवपेचों के बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य विधानसभा में मंगलवार सुबह 11 बजे होने वाले शक्ति परीक्षण की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं, जिसमें अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत की किस्मत का फैसला होगा। अब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नजर अब राज्य में प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीएफ) के छह विधायकों पर है।


इस बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि हमारे दोनों विधायक कांग्रेस को समर्थन करेगी। बता दें कि सरबत करीम और हरिदास बीएसपी के 2 विधायक हैं।


वहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को फ्लोर टेस्ट के लिए उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 10 मई को शक्ति परीक्षण के मद्देनजर राजधानी देहरादून में धारा-144 लागू करने से पहले ही विधानसभा के आसपास के इलाके को रैपिड एक्शन फोर्स के हवाले कर दिया गया है। सुरक्षा को लेकर कोई चूक न हो इसके लिए पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही ये निश्चित कर दिया गया है कि मंगलवार को विधानसभा परिसर में विधायकों और कर्मचारियों के अलावा कोई प्रवेश नहीं करे। यही नहीं, सभी को विधानसभा परिसर पैदल ही जाना होगा।


दो घंटे राष्ट्रपति शासन नहीं
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सुबह 11 बजे से फ्लोर टेस्ट होगा। इस दौरान दो घंटे के लिए राष्ट्रपति शासन नहीं रहेगा। फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा में मोबाइल फोन ले जाने पर पाबंदी रही। कोर्ट ने शक्ति परीक्षण के लिए विधानसभा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इस बीच भाजपा ने दावा किया है कि राज्य में भाजपा की ही सरकार बनेगी। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा और बीएसपी के बीच डील हो गई है।


उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल द्वारा उनकी सदस्यता खत्म करने के फैसले को चुनौती दी थी। प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को होने वाले शक्ति प्रदर्शन में वे अब हिस्सा नहीं ले पाएंगे।


पीडीएफ-बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दो विधायक, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के एक विधायक तथा तीन निर्दलीय विधायक-साल 2012 में सरकार के गठन के बाद ही हरीश रावत की सरकार का समर्थन कर रही थी।


कुल 70 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास 36 सदस्य थे, जिनमें से एक आंग्ल-भारतीय समुदाय का मनोनित सदस्य है। पार्टी के पास अब 28 विधायक बचे हैं, जिनमें से एक मनोनित है।


मनोनित सदस्य सदन में मतदान में हिस्सा ले सकते हैं।


अब विधानसभा में कुल 62 सदस्य बच चुके हैं, इसलिए राज्य में सरकार बनाने के लिए 32 विधायकों की जरूरत होगी।


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास 28 विधायक हैं, जिनमें एक निलंबित सदस्य भीमलाल आर्य हैं। भाजपा भी पीडीएफ के सदस्यों पर निगाह बनाए हुए है।


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