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वाराणसी-लखनऊ के मेट्रो स्टेशन देंगे इतिहास की झलक, एथेंस की तर्ज पर बनेगा म्यूजियम

 Tahlka News |  2016-05-11 03:39:17.0

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अनुराग तिवारी 

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
वाराणसी. शहर में मेट्रो ट्रेन चलाने के प्रोजेक्ट पर काम इस साल के अंत तक शुरू होना है। शहर के 80 फीसदी हिस्सों में यह अंडरग्राउंड ही दौड़ेगी। इसको लेकर शहर के लोगों को में एक आशंका है कि जमीन के अन्दर जो काशी का इतिहास दबा पड़ा है वह मेट्रो की खुदाई के चलते नष्ट हो जाएगा। लेकिन मेट्रो प्रोजेक्ट के जिम्मेदार अधिकारियों ने इतिहास को संजोने का हल भी निकाल लिया है।

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मेट्रो स्टेशन बनेंगे म्यूजियम
वाराणसी और लखनऊ में जमीन के अन्दर से जो ऐतिहासिक धरोहरें निकलेंगी उन्हें नजदीकी स्टेशन पर म्यूजियम बनाकर संजोया जाएगा। यह जानकारी tahlkanews.com से बात करते हुए लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन के डायरेक्टर प्रोजेक्ट्स एंड वर्क्स दलजीत सिंह ने दी। उन्होंने बतया कि ठीक ऐसी ही व्यवस्था ग्रीस के एथेंस मेट्रो स्टेशनों पर की गई है। उन्होंने बताया कि लखनऊ मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए दुनिया भर के मेट्रो स्टेशनों की केस स्टडी की गई है और उनकी बेहतरीन सुविधाओं का समावेश लखनऊ और वाराणसी सहित यूपी में बनने वाले मेट्रो स्टेशनों पर करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

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एथेंस की तरह ही है बनारस-बनारस का है इतिहास
दलजीत सिंह ने बताया प्राचीन ग्रीस सभ्यता के शहर एथेंस की तरह ही बनारस और लखनऊ शहर का अपना इतिहास है। इन दोनों शहरों में अंडरग्राउंड स्टेशनों के लिए खुदाई होने पर बहुत हद तक संभव है कि जमीन के नीचे दबा इतिहास का खजाना मिले। उन्होंने बताया कि जब एथेंस में के अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन के लिए खुदाई की गई तो वहां भी कई ऐतिहासिक धरोहरें मिलीं।

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नजदीकी स्टेशन को बनाया जाएगा म्यूजियम
दलजीत सिंह के मुताबिक़ बनारस शहर के कई पुराने इलाकों में मेट्रो का अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन होना है। ऐसे में संभव है कि जगह-जगह पर बनारस के पुरातत्व अवशेष मिलें। इन धरोहरों को वहां बनने वाले नजदीकी स्टेशन पर छोटा म्यूजियम बनाकर संजोया जाएगा, जिससे वहां आने वाली जनता अपने इतिहास से रूबरू हो सके।

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आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया से लेंगे सलाह
लखनऊ मेट्रो के डायरेक्टर ने बताया कि जिस तरह मेट्रो कंस्ट्रक्शन से पहले सर्वे किया जाता है और सिविक अमेनीटीज के ट्रान्सफर के लिए सम्बंधित विभागों से चर्चा कर पूरा प्लान बनाया जाता है, ठीक उसी तरह लखनऊ में भी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया से भी सलाह ली गई है और बनारस में भी ऐसा किया जाएगा। जमीन के नीचे जिन स्थानों पर एएसआई ऐतिहासिक धरोहरों के होने की संभावना जताएगा, वहां-वहां खुदाई के समय इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि उन्हें खुदाई से कम से कम नुकसान पहुंचे और उन्हें सुरक्षित बाहर निकला जा सके। उन्होंने कहा कि चूंकि अंडरग्राउंड खुदाई टनल बोरिंग मशीन (TBM) से होनी है इसलिए पहले से सावधानी रखनी जरुरी है।

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