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1500 करोड़ के घोटाले के आरोपों से घिरे अवध विश्वविद्यालय के कुलपति

 Tahlka News |  2016-06-16 11:24:28.0

faizabad pc

• भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान बना रहे हैं अवध विश्वविद्यालय के कुलपति, लगे गंभीर आरोप
• अवध विश्वविद्यालय में 1500 करोड़ के घोटाले, आरोपों से घिरे कुलपति
• अपने घोटालों को दबाने के लिए शिक्षको का उत्पीडन कर रहे हैं कुलपति

तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

लखनऊ. बीते एक महीने से फ़ैजाबाद के डा.राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फ़ैजाबाद के कुलपति प्रो. जीसी जायसवाल के खिलाफ चल रहा संघर्ष आज राजधानी पहुँच गया. विश्वविद्यालय कोर्ट के सदस्यों ने आज एक प्रेस वार्ता में कुलपति पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये. राजभवन को भेजी गयी तमाम शिकायतों पर कार्यवाही न होने के बाद अब शिक्षक और छात्र सड़को पर उतर रहे हैं.

कुलपति पर आरोप लगाते हुए संघर्ष समिति सदस्यों ने कहा कि कुलपति ने राज्यपाल एवं माननीय उच्चन्यायालय के आदेशों के बावजूद कोर्ट का गठन ही नही होने दिया और मनमाने ढंग से सरकारी धन का बन्दर बाट किया है. विश्वविद्यालय का वार्षिक बजट लगभग 500 करोड़ रूपये का होता है कुलपति ने विगत ढाई वर्षो में लगभग 1500 करोड़ रूपये मनमाने ढंग से खर्च कर दिये है.


कुलपति हटाओ विश्वविद्यालय बचाओ संघर्ष समिति के बैनर पर प्रेस क्लब में हुयी इस प्रेस वार्ता में कोर्ट सदस्य सुधीर द्विवेदी ने कहा कि प्रो जायसवाल के कार्यकाल में पुस्तकालय के लिए बिना किसी शिक्षक से बात किए हुए 16 करोड़ रुपये की अनुप्रयोगी पुस्तके खरीद ली गयी हैं.इसका सप्लायर भी कुलपति का नजदीकी एक ही व्यक्ति है.

दिवेदी ने आरोप लगते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की परीक्षाओं हेतु उत्तरपुस्तिकाओं की आपूर्ति में विश्वविद्यालय ने विगत लगभग 15 वर्षों में 70 से 80 करोड़ रूपये खर्च किए हैं और आश्चर्य यह है कि यहाँ भी एक ही आपूर्तिकर्ता उत्तरपुस्तिकाओं की आपूर्ति कर रहा है. विश्वविद्यालय उपयोग के बाद जब इन उत्तरपुस्तिकाओं की नीलामी करता है तो इनकी संख्या में 60 से 80 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है.

फैजाबाद के प्रबुद्ध नागरिक अतुल सिंह ने बताया कि सी0पी0एम0टी0 2016 हेतु कुलपति द्वारा अपने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अपने नाम एकल खाता खुलवाकर गम्मीर अनियमितता की गयी है। उस खाते में विश्वविद्यालय के खाते से 15 करोड़ रूपए स्थानान्तरित किए और फिर पावर आफ अटार्नी के माध्यम से एक शिक्षक के हस्ताक्षर से 3 करोड़ रूपये निकाल कर खर्च कर दिये गए.उन्होंने इस मामले के खुलासे के लिए सी0पी0एम0टी0 2016 के लेखा की सघन जाँच की मांग की.

पूर्व छात्र नेता और कोर्ट सदस्य ओम प्रकाश सिंह ने परीक्षाओ के दौरान परीक्षा केन्द्रो निरस्त कर पुनः बहाली कर करोड़ों रूपये का खेल करने का खुलासा किया. उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान नकल के नाम पर पहले तो परीक्षा केन्द्र निरस्त किए गये. जब उन केन्द्रो से मनोवांछित धनउगाही हो गयी तो रातों रात उनके केन्द्र बहाल कर दिए गये और यही नही और भी केन्द्रों को उनसे सम्बद्ध कर दिया गया. समिति ने आरोप लगाया कि अनुमानतः प्रति परीक्षा केन्द्रों से 2 लाख रूपये की दर से लगभग 600 परीक्षा केन्द्रों से 12 करोड़ रूपये की वसूली सिर्फ इसी सत्र में की गयी है.

ऐसा ही एक प्रकरण अम्बेडकरनगर जनपद के अशोक स्मारक महाविद्यालय का है जिसमें वर्ष 2014 में संगठित नकल पकड़ी गयी थी को पुनः विश्वविद्यालय नें दोषमुक्त करते हुए परीक्षा केन्द्र बना दिया जबकि पुलिस नें अपनी चार्जशीट में संगठित नकल के आरोप की पुष्टि की है.

कोर्ट सदस्यों का कहना है कि विश्वविद्यालय में पूर्णकालिक कुलसचिव के रहते हुए कुलपति नें उपकुलसचिव के माध्यम से सम्बद्धता की पत्रावलियों का निस्तारण पूर्णतया लेन देन के आधार पर किया. 350 महाविद्यालयों को अस्थायी सम्बद्धता प्रदान की गयी जबकि शासनादेश में 3 साल की सम्बद्धता का प्राविधान है.

भष्टाचार के एक अन्य मामले का उदहारण देते हुए कोर्ट सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय में सुरक्षा हेतु सुरक्षा एजेंसियों के चयन हेतु अपने जनपद वाराणसी की एंक एजेन्सी को ठेका देने हेतु 4 बार निविदा निरस्त की गयी. उसके बाद भी मनमाने ढंग से उक्त एंजेन्सी को ठेका दे किया गया और एजेंसी को लाखों रूपये का फर्जी भुगतान भी किया जा रहा है. विश्वविद्यालय में कार्यरत मालियों को बिना टेन्डर कराए कई लाख रूपये का प्रतिमाह अनियमित भुगतान किया जा रहा है. दोनो प्रकरणों में कुलपति द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़ रूपये का भुगतान किया जारहा है.

समिति के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाये कि कुलपति के नियमविरुद्ध कार्यो का शिक्षको द्वारा विरोध करने वाले शिक्षको का उत्पीडन भी किया जा रहा है और शिक्षकों एवं अन्य पर दर्जनो फर्जी मुकदमें दर्ज कराए गए तथा पुलिस जांच में लगभग सभी मुकदमें फर्जी पाए गये. शिक्षक संघ के महामंत्री डा. प्रदीप सिह, डा. एस.पी. सिंह एवं 11 अन्य शिक्षक, डा. विनोद कुमार चैधरी के खिलाफ कुलपति ने मुकदमा दर्ज कराया मगर बाद में पुलिस द्वारा जांच में तथ्यहीन एवं फर्जी पाया. इसी तरह विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डा. अजय प्रताप सिंह के खिलाफ भी फर्जी मुकदमा पंजीकृत करा दिया है.

संघर्ष समिति ने कहा कि यदि उनके आरोपों की जांच राजभवन नहीं कराता तो मुख्यमंत्री के संज्ञान में इन शिकायतों को लाया जायेगा और फैजाबाद से ले कर लखनऊ तक सड़को पर उतरा जायेगा.

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