Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

अब किस करवट जायेगी समाजवादी राजनीति !

 Tahlka News |  2016-12-28 12:59:52.0

mulayam-akhilesh-samne

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. जिस वक्त बुंदेलखंड के अपने दौरे के बाद लखनऊ के लिए रवाना हो रहे थे , ठीक उसी वक्त समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर आगामी विधान सभा चुनावो के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर रहे थे. बीते तीन दिनों से समाजवादी पार्टी के टिकटों की सूची पर चल रहे घमासान के बाद किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि टिकटों की घोषणा इतनी जल्दी हो जाएगी और इस सूची में अखिलेश यादव के प्रमुख समर्थको का पत्ता साफ़ हो जायेगा. इतना ही नहीं मुलायम सिंह यादव ने मीडिया के सामने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पार्टी ने किसी को भी मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित किया है. साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस या किसी और दल से कोई गठबंधन नहीं किया जायेगा.


बुधवार को मुलायम सिंह ने पार्टी के कब्जे वाली जिन 176 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की उसने कईयों के होश उड़ा दिए. कई कद्दावर मंत्रियों सहित कुल 53 सिटिंग विधायको के टिकट काट दिए गए थे (तहलका न्यूज ने अपने पाठको को पहले ही इसकी खबर दे दी थी). हालिया दिनों में अखिलेश यादव के करीबी दिख रहे कद्दावर मंत्री अरविन्द सिंह गोप, राम गोविन्द चौधरी और पवन पाण्डेय के टिकट काट दिए गए हैं और शैलेन्द्र यादव ललई और अभिषेक मिश्र के नाम पर संशय बरक़रार रखा गया है.

इसके अलावा अखिलेश सरकार से बर्खास्त कर दिए गए आठ मंत्रियों को टिकट मिला है, वे हैं नारद राय ,अम्बिका चौधरी , शादाब फ़ातिमा , ओम प्रकाश सिंह , राजा महेंद्र अरदमन सिंह , शिवपाल सिंह यादव , शिव कुमार बेरियाँ , योगेश प्रताप सिंह , राज किशोर सिंह.

सूत्रों के अनुसार अखिलेश यादव ने जो सूची मुलायम सिंह को सौंपी थी उसमे से ज्यादातर नाम मुलायम की सूची में है. ज्यादातर नाम दोनों की सूची में कामन है लेकिन जिन लोगो के टिकट काटे गए हैं उनमे से कई ऐसे हैं जो बड़ी चर्चा को जन्म देते हैं.

अखिलेश यादव ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि मैंने जो सूची दी थी उसमे जिताऊ उम्मीदवारों के नाम थे , मैं नेतृत्व से इसपर पुनर्विचार विचार करने को कहूँगा.

अम्बिका चौधरी , शादाब फातिमा और ओम प्रकाश सिंह शिवपाल खेमें के जाहिर सदस्य हैं , प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद इन सभी को शिवपाल ने मंत्री पद से बर्खास्त होने के बाद संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर बैठा दिया था.

इस सूची के आने के बाद अब इस बात के कयास लगाए जाने लगे हैं कि अखिलेश यादव अब कोई न कोई पलटवार करेंगे और ऐसे हालत में इस सूची में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा या फिर पार्टी के भीतर कुछ बड़े परिवर्तन होंगे. हालाकि जब मुलायम सिंह से यह पूछा गया तब उन्होंने इस बात का स्पष्ट खंडन किया और अब किसी भी बदलाव से इनकार कर दिया.

मुलायम के इस पैंतरे को कही से समाजवादी पार्टी के लिए माकूल नहीं माना जा सकता. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अखिलेश यादव की सामान्य छवि मुलायम से ज्यादा अच्छी है. नोट बंदी के बाद भाजपा जिस तरह से लडखडाई हुयी है उसमे समाजवादी पार्टी के लिए इस बात की पुरजोर संभावना बन गयी थी कि वह दुबारा सत्ता में आ जाये, अखिलेश यादव ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के प्रति नरम रुख दिखाते हुए गठबंधन पर अपनी स्वीकृति दे दी थी और इस तरह से ही बसपा को रोका जा सकता है, मगर जिस तरह से अखिलेश को दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है उसने इस संभावनाओं पर ग्रहण लगा दिया है.

सूची में अखिलेश यादव का नाम भी नहीं है. मुलायम सिंह ने कहा कि वह जहाँ से मन होगा चुनाव लड़ेंगे मगर इस बात से संकेत तो मिल ही गए कि पार्टी अखिलेश को चुनाव नहीं लड़ना चाहती. हांलाकि पार्टी ने अभी भी 78 सीटों पर प्रत्याशी नहीं घोषित किये हैं मगर जिस तरह से अखिलेश के करीबियों का टिकट काटा गया है वह मुलायम के रुख को दिखा रहा है. हालाकि अब कुल संघर्ष अतीक जैसे अपराधी छवि वाले लोगो और लगभग 10 महत्वपूर्ण नामो पर ही रह गया है.

मुलायम सिंह द्वारा सूची जारी करने के बाद ही पार्टी कार्यालय में चर्चाओं के दौर शुरू हो गए हैं मगर सियासी दंगल के बड़े पहलवान मुलायम सिंह यादव ने जिस तरह से 78 सीटों को बचा कर रखा है वह किसी भी संभावित संघर्ष को टालने की उनकी रणनीति का ही हिस्सा है.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top