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जब भाजपा ने कहा, करेंसी बदलने से गरीब तबाह हो जायेंगे

 Tahlka News |  2016-11-14 07:54:58.0

manmohan-modi

लखनऊ. आज इस बात का यकीन करना बहुत मुश्किल है मगर ये सच है कि सरकार में आने के लगभग 5 महीने पहले भाजपा ने कहा था कि करेंसी बदलने के फैसले से तो गरीब तबाह हो जाएंगे. उस वक्त इस आशय के प्रस्ताव पर कांग्रेस की सरकार चर्चा करने वाली थी कि 2005 के पहले के सभी बड़े करेंसी नोट वापस ले लिए जाए.

इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर फिर ये चर्चा जोर पकड़ रही है कि दरअसल भाजपा मनमोहन सरकार के हर निराने का उस वक्त विरोध करती थी मगर सत्ता में आने के बाद वही सारे काम कर रही है जिसका प्रस्ताव मनमोहन सरकार ने किया था.

आज पीएम मोदी के समर्थक माने जाने वाले समाचारचैनल ज़ी न्यूज़ के पोर्टल पर “करेंसी बदलने के फैसले से तो गरीब तबाह हो जाएंगे” शीर्षक से Thursday, January 23, 2014 को 18:02 पर First Published और Thursday, January 23, 2014 को 20:56 पर Last Updated हुई थी। अब तक इसके 4593 Share हुए हैं।


खबर इस तरह है -

नई दिल्ली : भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने कालेधन पर काबू पाने के नाम पर वर्ष 2005 से पहले के सभी करेंसी नोट वापस लेने का जो निर्णय किया है वह आम आदमी को परेशान करने और उन ‘चहेतों’ को बचाने के लिए है जिनका भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद के बराबर का कालाधन विदेशी बैंकों में जमा है।

पार्टी ने कहा कि यह निर्णय बैंक सुविधाओं से वंचित दूर दूराज के इलाकों में रहने वाले उन गरीब लोगों की खून पसीने की गाढ़ी कमाई को मुश्किल में डाल देगा जिसे उन्होंने वक्त जरूरत के लिए जमा किया है।

भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने यहां कहा, अवसरों को गंवाने वाले संप्रग के 10 साल के शासन में पी चिदंबरम 7 साल वित्त मंत्री रहे हैं और अब सरकारी की चली चलाई की बेला में वह लोगों द्वारा पूछे जा रहे सवालों से भागने के लिए कालेधन के विषय से जनता के असली मु्द्दों को भ्रमित करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘..लेकिन सरकार का यह फैसला विदेशी बैंकों में अमेरिकी डालर, जर्मन ड्यूश मार्क और फ्रांसिसी फ्रांक आदि करेंसियों के रूप में जमा भारतीयों के कालेधन में से एक पाई भी वापस नहीं ला सकेगा। इससे साफ है कि सरकार का विदेशों में जमा भारतीयों के कालेधन को वापस लाने का कोई इरादा नहीं है और वह केवल चुनावी स्टंट कर रही है।’ लेखी के अनुसार दूसरी ओर इस निर्णय से दूर दराज के इलाकों के गरीबों की मेहनत की कमाई पर पानी फिर जाने का पूरा खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि देश की 65 प्रतिशत आबादी के पास बैंक खातों की सुविधाएं नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि गरीब और आदिवासी लोग पाई पाई करके अपनी बेटियों की शादी ब्याह और अन्य वक्त जरूरत के लिए घर के आटे-दाल के डिब्बों आदि में धन छिपा कर रखते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में बैंकों की सुविधा नहीं होने के कारण अधिकतर लोग अपना धन 2005 के बाद की करेंसी से नहीं बदल पाएंगे या बिचौलियों के भारी शोषण का शिकार होंगे।

भाजपा नेता ने कहा कि देश की बहुत बड़ी आबादी ऐसी होगी जिसे इस खबर का पता भी नहीं होगा और वक्त जरूरत के लिए जब वे अपना यह कीमती धन खर्च करने के लिए निकालेंगे तब उन्हें एहसास होगा कि उनकी कड़ी मेहनत की कमाई कागज का टुकड़ा भर रह गई है। सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्णय आम आदमी और आम औरत को परेशान करने तथा उन ‘चहेतों’ को बचाने के लिए है जिनका भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद के बराबर का कालाधन विदेशी बैंकों में जमा है।
उल्लेखनीय है कि कालेधन और नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिये भारतीय रिजर्व बैंक ने 2005 से पहले जारी सभी करेंसी नोट वापस लेने का फैसला किया है। इसके तहत 500 रुपये व 1000 रुपये सहित सभी मूल्य के नोट वापस लिए जाएंगे और यह काम एक अप्रैल से शुरू हो जायेगा। रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा है, कि एक अप्रैल 2014 से लोगों को इस तरह के अपने नोट बदलने के लिए बैंकों से संपर्क करना होगा। (एजेंसी)

साभार : हस्तक्षेप डाट काम

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