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इस प्रतिभाशाली डाक्टर का क़त्ल किसने किया

 Sabahat Vijeta |  2016-10-05 13:35:37.0

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शबाहत हुसैन विजेता


लखनऊ. झांसी के रानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कालेज के हास्टल में एमएस की छात्रा डॉ. प्रीति मिश्रा की संदिग्ध मौत के मामले से धुंध छंटने का नाम नहीं ले रही है. गोरखपुर की प्रीति सैफई के मेडिकल कालेज से एमबीबीएस में गोल्ड मेडल लेकर झांसी में एमएस करने गई थी. इसी 29 सितम्बर की रात मेडिकल कालेज के हास्टल में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. प्रतिभाशाली डाक्टर की मौत के मामले पर मेडिकल कालेज प्रशासन लीपापोती में जुटा है.


गोरखपुर में रेलवे में टेक्नीशियन हैं देवेन्द्र मिश्र. उनकी दो बेटियाँ और एक बेटा अंकुर है. बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है. छोटी बेटी प्रीति ने कम्पटीशन पास कर सैफई के मेडिकल कालेज में प्रवेश लिया और 2013 में गोल्ड मेडल के साथ एमबीबीएस पास किया. एमबीबीएस के बाद डॉ. प्रीति मिश्रा झांसी में एमएस करने चली गई. झांसी के रानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कालेज में दो तरह के हास्टल हैं एक में अविवाहित डाक्टर रहते हैं और दूसरे में अविवाहित डाक्टर रहते हैं. प्रीति अविवाहित डाक्टरों के हास्टल में रहकर एमएस की पढ़ाई कर रही थी. 2 अक्टूबर को उनका बर्थडे था इसलिए उन्होंने पहली अक्टूबर को गोरखपुर जाने के लिए अपना रिज़र्वेशन करा रखा था. घर जाने से पहले प्रीति ने माँ की दवाइयाँ और भतीजे के लिए लूडो खरीदा था.


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29 सितम्बर को प्रीति ने अपने घर बात भी की थी और अपनी बर्थडे पर गोरखपुर आने की बात कही थी. 29 की रात को प्रीति के घर झांसी से फोन आया और बताया गया कि प्रीति को डायरिया हो गया है और वह अस्पताल में है. दस मिनट बाद ही दूसरा फोन आया और उसमें प्रीती की मौत हो जाने की बात कही गई. परिवार के लोगों ने पूछा कि प्रीति इस समय कहाँ है तो बताया गया कि अपने हास्टल में. परिवार ने शव को यथास्थिति रखने की बात कहते हुए तुरंत झांसी रवाना होने की बात कही.


प्रीति का परिवार झांसी पहुंचा तो प्रीति विवाहित डाक्टरों के हास्टल के कमरा नंबर 69 में मिली. उसने लाल रंग का कम्बल ओढ़ रखा था. एक हाथ में ड्रिप लगी थी. बाटल खिड़की से लटक रही थी. मुंह से झाग निकल रहा था और नाक से खून बह रहा था. मौके पर मौजूद पुलिस ने बताया कि दरवाज़ा भीतर से बंद था. वेंटीलेटर से सरिया डालकर दरवाज़ा खोला गया.


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परिवार ने पहला सवाल उठाया कि विवाहित डाक्टरों के हास्टल में प्रीति कैसे आई? तो बताया गया कि प्रीति ने जल्दी ही शादी करने की बात करते हुए विवाहित डाक्टरों वाले हास्टल के लिए आवेदन किया था. प्रीति हास्पिटल में थी तो फिर हास्टल कैसे पहुँची? इस पर बताया गया कि प्रीति ने खुद कहा कि वह ठीक महसूस कर रही है और हास्टल जाना चाहती है. कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए. प्रीति दरवाज़ा बंद कर लेटी थी तो फिर उसे ड्रिप किसने लगाईं? ड्रिप खुद लगाई तो कम्बल किसने उढ़ाया? दरवाज़ा उस वेंटिलेटर से कैसे खोला गया जिस वेंटीलेटर में शीशा फिक्स था. दरवाज़े की कुण्डी कैसे उखड़ी? प्रीति ने दस दिन पहले ही हास्टल बदल लिया था तो अपने परिवार को सूचित क्यों नहीं किया? उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट परिवार को क्यों नहीं दी गई? परिवार ने हत्या किये जाने की सम्भावना जताए जाने की जो तहरीर दी उसे लिखने में 4 दिन क्यों लगे? जिस कमरे में मौत हुई उसे फ़ौरन सील क्यों नहीं किया गया? प्रीति डायरी लिखती थी उसकी डायरी और लैपटाप कमरे से गायब मिला. उसकी तलाश क्यों नहीं की गई?


डॉ. प्रीति के भाई अंकुर मिश्रा ने बहन की हत्या की आशंका जताते हुए आई जी ज़ोन को दिए पत्र में यह मांग की है कि अस्पताल की इमरजेंसी की सीसीटीवी फुटेज, मरीजों का भर्ती रजिस्टर, प्रीति को दी गई दवाइयों का प्रिस्क्रिप्शन उपलब्ध कराया जाए.

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