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राम नाईक ने बताया- 'वंदे मातरम' क्यों नहीं बन सका राष्ट्रगान

 Tahlka News |  2016-03-15 17:38:36.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
पीलीभीत, 15 मार्च. यूपी के गवर्नर राम नाईक ने अपने एक बयान से सभी को चौंका दिया है। राम नाईक ने कहा कि नेहरु के विरोध के चलते वंदेमातरम राष्ट्रगान नहीं बन पाया। गवर्नर ने मंगलवार को पीलीभीत में संस्कार भारती के क्षेत्रीय साहित्यिक समारोह के अवसर पर 'साहित्य का धर्म' विषयक संगोष्ठी में शिरकत की।


यहां राम नाईक ने कहा कि वंदे मातरम जैसे दो शब्द की ताकत रही कि पूरे देश ने एकजुट हो आजादी की जंग लड़कर जीत लिया। आजादी के बाद अधिकांश लोग वंदेमातरम को राष्ट्रगान चाहते थे, लेकिन नेहरू की इच्छा का सम्मान रखते हुए सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने जन गण मन को राष्ट्रगान घोषित किया। वंदेमातरम को राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया।


सदन में कभी नहीं गाया गया राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत
गवर्नर ने कहा कि 1950 में संविधान लागू होने के बावजूद लोकसभा व राज्यसभा में कभी राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत नहीं गाया गया था। जब 1989 में सांसद बनकर मैं सदन में पहुंचा तो केरल के एक सांसद ने सवाल उठाया था कि क्या सभी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत होता है। इसको लेकर लंबा सवाल-जवाब चला। इसी बीच मैंने सवाल उठाया कि अब तो दूरदर्शन पर भी प्रश्नकाल दिखाया जाता है। ऐसे में सदन में राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत जरूर होना चाहिए, ताकि उससे पूरे देश को प्रेरणा मिला। तब पहली बार 1993 में दोनों सदनों में इसका सस्वर गान हुआ।


हिंदी बड़ी दीदी हैं
राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत तो सभी भारतीय भाषाओं की जननी है। हिंदी बड़ी दीदी हैं और सभी भारतीय भाषाएं बहनें हैं। ऐसे में हिंदी साहित्यकारों को इसी अनुरूप कार्य व्यवहार करना चाहिए। जबकि धर्म के बारे में मैंने बचपन में पढ़ा है धारयते धर्म:। जो धारण करने योग्य है वहीं धर्म है। धर्म के साथ कर्तव्य भी जुड़ा है। इस मौके पर मुख्य अतिथि राज्यपाल ने तीस लोगों को संस्था की ओर से सम्मानित किया।

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