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पति-पिता का सपना पूरा करने के लिए, पैदल घूम मांग रही है वोट

 Anurag Tiwari |  2017-02-08 09:38:08.0

पति-पिता का सपना पूरा करने के लिए, पैदल घूम मांग रही है वोट

तहलका न्यूज ब्यूरो

हमीरपुर. इस महिला के उम्र महज 35 साल है. क्वालिफिकेशन एमफिल और सपना था प्रोफेसर बनने का, लेकिन समय ऐसा पलटा कि पति और पिता का सपना पूरा करने के लिए चुनाव मैदान में उतरना पड़ा. सहज तरीके से पति-पिता का सपना पूरा करने के लिए चुनाव क्षेत्र में घर-घर के चक्कर लगा रही है.



जालौन की रहने वाली मनीषा हमीरपुर के राठ असेंबली सीट से बीजेपी की उम्मीदवार हैं. उन्होंने अपने पति का सपना पूरा करने के लिए एमफिल की पढाई के बाद पीएचडी की पढाई छोड़ दी और साथ ही अपना प्रोफेसर बनने का सपना भी तोड़ दिया. मनीषा के पति ललितपुर जिले में फारेस्ट रेंजर के पद पर तैनात हैं जबकि पिता पुलिस विभाग के रिटायर्ड इंस्पेक्टर हैं.




मनीषा ने 2008 में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद झांसी यूनिवर्सिटी से 2010 में एमएससी बाटनी से किया और इसके बाद फैजाबाद से पीएचडी की पढ़ाई शुरू की थी. मनीषा ने बचपन से ही प्रोफेसर बनने का सपना देखा था. मनीषा के पिता भी मनीषा के इस सपने को पूरा करने में सहयोग कर रहे थे. इसी बीच मनीषा की शादी का बात चल पड़ी.


साल 2010 में 25 जुलाई को मनीषा की शादी लेखराम अनुरागी से हुई. लेखराम ने मनीषा को पॉलिटिक्स में जाने की सलाह दी और कहा की यह उनका सपना है. इसके बाद मनीषा ने साल 2012 में नगर पालिका राठ के चेयरमैन के लिए परचा भरा लेकिन वे 300 वोटों से चुनाव हार गईं थी.

अब मनीषा एमएलए का चुनाव लड़ रही हैं. मनीषा ने नामांकन भरते समय जो अपनी प्रॉपर्टी का डिटेल दिया उसके मुताबिक़ उनके पास एक भी चौपहिया वाहन नहीं है. कैश के नाम पर उनके पास महज 30,000 रुपये है तो पति लेखराम के पास महज 40,000 रुपये कैश हैं . मनीषा के पास तीन बैंक अकाउंट हैं, जिनमे 1.05 लाख रुपये तो पति के अकाउंट में महज 4000 रुपये जमा है. मनीषा के पास एक साढ़े 4 लाख रूपये का लाइफ इंश्योरेंस पालिसी है जो पति लेखराम के नाम है.

मनीषा के पास कोई व्हीकल न होने के चलते वे पैदल घर-घर जाती हैं और लोगों से उन्हें जिताने की अपील करती हैं. उन्होंने जनता से वादा किया है कि अगर चुनाव जीतकर वे एमएलए बनती हैं तो राठ में रेलवे की सुविधा उपलब्ध करवाएंगी और साथ राठ के स्वामी ब्रम्हानंद डिग्री कालेज को यूनिवर्सिटी में अपग्रेड करवाएंगी.

मनीषा कहती हैं कि 'मैं सुबह तैयार होने के बाद सबसे पहले पूजा करती हूं." किसी गांव में कैंपेनिंग के दौरान भी वे सबसे पहले वहां के मंदिर में माथा टेकती हैं. मनीषा का यही धार्मिक स्वभाव स्थानीय लोगों को प्रभावित कर जाता है, वह जिस भी गांव में जाती हैं, वहां के स्थानीय मंदिर में जरूर जाती हैं.

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